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सहारनपुर से बड़ी खबर: दबंगों ने सरकारी चकरोड पर किया कब्जा, नगर निगम के आदेश के बावजूद प्रशासन मौन!

सहारनपुर से सामने आई यह खबर न केवल प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे दबंग लोग सरकारी संपत्तियों पर खुलेआम कब्जा कर रहे हैं और प्रशासनिक आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

🛑 सहारनपुर से बड़ी खबर: दबंगों ने सरकारी चकरोड पर किया कब्जा, नगर निगम के आदेश के बावजूद प्रशासन मौन!

सहारनपुर | विशेष रिपोर्ट: एलिक सिंह, संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
सूत्रों पर आधारित गहन रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भले ही अवैध कब्जों पर सख्ती की बात कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान कर रही है। सहारनपुर से सामने आई यह खबर न केवल प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे दबंग लोग सरकारी संपत्तियों पर खुलेआम कब्जा कर रहे हैं और प्रशासनिक आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

📍 कहां का है मामला?

यह मामला सहारनपुर शहर के जनता रोड स्थित ब्लॉक कार्यालय के ठीक सामने का है, जहां कीमती सरकारी जमीन पर बनी सरकारी चकरोड को दबंगों ने अपनी निजी संपत्ति समझ लिया और वहां अवैध रूप से दुकानों और मकानों का निर्माण कर लिया

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब एक दिन में नहीं हुआ—यह निर्माण प्रशासन की आंखों के सामने धीरे-धीरे होता रहा, लेकिन किसी अधिकारी ने न तो विरोध किया, न ही रोकने की कोशिश

📄 नगर निगम ने दिया था स्पष्ट आदेश, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

इस कब्जे के खिलाफ नगर निगम ने 22 जनवरी 2025 को एक आधिकारिक आदेश जारी किया था। इस आदेश में सिटी मजिस्ट्रेट, उपजिलाधिकारी (SDM) और पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया गया था कि चकरोड से कब्जा तुरंत हटाया जाए और अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया जाए

लेकिन खबर लिखे जाने तक न तो कब्जा हटाया गया और न ही किसी निर्माण को गिराया गया। आदेशों के बावजूद इस प्रकार की निष्क्रियता प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

🔍 सूत्रों का दावा: “सेटिंग-गेटिंग” से हुआ मामला शांत

खास बात यह है कि यह मामला अब तक कागजों तक ही सीमित रह गया है। सूत्रों के अनुसार, प्रभावशाली दबंगों ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ “सेटिंग-गेटिंग” करके मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

यह भी सामने आया है कि बेनामा (प्रॉपर्टी का दस्तावेज़) किसी और स्थान का है, लेकिन कब्जा किसी अन्य भूमि (सरकारी चकरोड) पर कर लिया गया है। यानी “दस्तावेज़ एक ज़मीन का और कब्ज़ा दूसरी पर”—यह धोखाधड़ी और मिलीभगत का जीता-जागता उदाहरण है।

🧱 प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता?

स्थानीय लोगों की मानें तो कब्जा करने वालों को कुछ राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। वहीं पीड़ित ग्रामीणों और क्षेत्रीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है।

🛡️ योगी सरकार की नीति और जमीनी हकीकत में फर्क?

योगी आदित्यनाथ सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में अवैध कब्जे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। जमीन माफियाओं पर गैंगस्टर एक्ट, जमीन को मुक्त कराकर सार्वजनिक कार्यों के लिए उपयोग में लाने की नीति अपनाई गई है।

लेकिन इस मामले में नगर निगम द्वारा जारी आदेश की अवहेलना, और स्थानीय प्रशासन की चुप्पी यह दर्शाती है कि कुछ अधिकारी सरकार की मंशा पर पानी फेरने में लगे हुए हैं।

प्रश्न जो प्रशासन से पूछे जाने चाहिए:

  • सरकारी आदेश के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

  • क्या नगर निगम के आदेश अब कागजों तक सीमित रह गए हैं?

  • क्या प्रशासन दबंगों के दबाव में काम कर रहा है?

  • जब जमीन सरकारी है, तो निर्माण कैसे हुआ?

📣 जनता की मांग: निष्पक्ष जांच और तुरंत ध्वस्तीकरण

स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जागरूक जनों ने मांग की है कि इस मामले में जांच कमेटी गठित की जाए, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही की जाए और चकरोड से कब्जा तत्काल हटाया जाए


रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
जिला प्रभारी – भारतीय पत्रकार अधिकार परिषद
📞 संपर्क: 8217554083

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